Monday, May 29, 2023

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बैठक हुई नहीं और उच्च अधिकारी ने थमा दिए 28 हजार के बिल

जनजातीय विकास विभाग के सामने पैदा हुआ संकट

धर्मशाला में 14 जुलाई को होनी थी गद्दी एवं गुज्जर कल्याण बोर्ड की बैठक

शिमला। हिमाचल सरकार के एक वरिष्ठ नौकरशाह इन दिनों खासी चर्चा में हैं। चर्चा इसलिए, क्योंकि नौकरशाह ने गद्दी एवं गुज्जर कल्याण बोर्ड की जो बैठक सरकार ने स्थगित कर दी थी, उसके नाम पर करीब 28 हजार रुपए के बिल क्लेम किए हैं।

अधिकारी ने अपने बिल जनजातीय विकास विभाग को थमाए हैं। विभाग के लिए अब वरिष्ठ नौकरशाह के बिल रिजेक्ट करना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।

इसलिए स्थगित की गई बैठक

दरअसल, सरकार ने बीते 14 जुलाई को धर्मशाला में गद्दी एवं गुज्जर कल्याण बोर्ड की बैठक रखी थी। इससे पहले 12 जुलाई को भारी बारिश ने कांगड़ा जिला में खूब तबाही मचाई। स्थानीय प्रशासन राहत एवं बचाव कार्य में जुट गया, जिसे देखते हुए सरकार ने बैठक स्थगित करने का निर्णय लिया। यह सूचना ज्यादातर अधिकारियों को 12 जुलाई की शाम को ही दे दी गई, लेकिन ज्यादातर अधिकारियों को बैठक स्थगित होने की जानकारी 13 जुलाई को देरी से लग पाई।

13 जुलाई को शिमला से धर्मशाला गए नौकरशाह

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली गद्दी एवं गुज्जर कल्याण बोर्ड की बैठक में लगभग सभी विभागों के सचिव एवं कई विभागाध्यक्षों ने शामिल होना था। इसके लिए एक वरिष्ठ नौकरशाह 13 जुलाई को पूर्व योजना के तहत शिमला से धर्मशाला के लिए रवाना हुए।

सरकारी रैस्ट हाउस की बजाय निजी होटल में रुके

धर्मशाला में सरकारी सर्किट हाउस और रैस्ट हाउस में ठहरने के बजाय तीन दिन तक निजी निजी होटल में रुके। तब तक इस बात की किसी दूसरे अधिकारी को कानों-कान खबर तक नहीं थी कि वरिष्ठ नौकरशाह बैठक के लिए धर्मशाला गए हुए है। जैसे ही उन्होंने अपने बिल जनजातीय विभाग को सौंपे तो यह खबर सचिवालय में आग की तरह फैल गई।

जनजातीय विभाग के गले की फांस बने बिल

वरिष्ठ नौकरशाह के बिल जनजातीय विकास विभाग के लिए अब गले की फांस बन गए हैं, क्योंकि जो बैठक नहीं हुई है, उसके नाम पर बिलों की अदायगी नियमों के खिलाफ है। खासकर ऐसे हालात में जब हिमाचल प्रदेश 60 हजार करोड़ रुपए से अधिक के कर्ज में डूबा हुआ है। अब देखना दिलचस्प होगा कि विभाग इस उधेड़बुन से कैसे निजात पाता है।

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